भारत को दुनिया की महानतम अर्थव्यवस्था बनाने के लिये हमें क्या करना है आज?

  1. आगे की यात्रा पर चलने के पहिले जानना जरूरी नहीं है, कि हमारा वाहन क्या है; जिस पर सवार होकर हम मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखने को तैयार हों?
  2. क्या हमें मालूम है कि हममें से प्रत्येक व्यक्ति दस हजार अन्य लोगों की तुलना में कम से कम एक काम बेहतर तरीके से कर सकता है?
  3. अब यदि कोई हममें से उस छिपी हुई प्रतिभा, जुनून और  योग्यता को खौज निकाले; जिससे हमारी बढ़ी हुई क्षमता से हम बेहतर उत्पादकता हासिल कर सकें; तो क्या काम से संबंधित तनाव और घर्षण काफी कम नहीं हो जाएगा? 
  4. क्या यह चौकोर छेद में गोल खूंटी होने की हताशा का हल नहीं हो सकता; जिससे कभी का सोने की चिड़िया जैसा हमारा देश आज गुजर रहा है?
  5. क्या हम यह समझ गये, कि इस प्रकार बिना किसी अतिरिक्त शिक्षा, पूंजी या शासन की मदद के; हम कुछ ही वर्षों के भीतर भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में बदल सकते हैं कि नहीं?
  6. क्या हम कुछ समय के लिए सभी प्रकार की नकारात्मकता को दूर कर इस बात पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं कि हमारी क्या ताकत अभी भी हमारे साथ बनी हुई है?
  7. इस असंभव से लगते लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, क्या हमें अपनी इस छिपी हुई ताकत का लाभ नहीं उठाना चाहिए?
  8. क्या हम देख सकते हैं कि अब तक हमने अपने साथी देशवासियों के संयुक्त प्रयासों से क्या हासिल कर चुके?
  9. इस प्रयोजन के लिए क्या हम वह तालिका देख सकते हैं जो दर्शाती है आकलन वर्ष 2018-19 के लिए सभी आयकर दाताओं की कुल कितनी आय है?
All Taxpayers – Gross Total Income (AY 2018-19
All Taxpayers – Gross Total Income (AY 2018-19
  1. क्या यहाँ हम यह देख सकते हैं कि 5 87 13 458 व्यक्तियों ने सामूहिक रूप से कुल आय 51,33,084 करोड़ अर्जित की; जो क्या औसतन 874260 रूपए प्रति व्यक्ती नहीं होती है?
  2. क्या ३१ मार्च 2018 को लगभग 587 लाख लोगों की व्यक्तिगत आय के इस स्तर के साथ हमारी जीडीपी 125.6591लाख करोड़ रुपए या कुल आय की लगभग 2.25 गुना रिपोर्ट नहीं की गई थी?
  3. तो क्या मात्र $5 ट्रिलियन लक्ष्य तक पहुँचने के लिए हमारी कुल आय इसके 40% से ऊपर नहीं होनी चाहिए? जो कि लगभग $ 2 ट्रिलियन या रुपयों में 144.30 लाख करोड़ है। (शनिवार 29 फरवरी 2020 को @ 1 USD = रुपए 72..15 की दर से)
  4. क्या सामूहिक रूप से हमने पहले ही 51.33 लाख करोड़ रुपये की आय प्राप्त नहीं कर ली है? इसलिए क्या हमें केवल 92.97 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त नहीं कमाने होंगे?
  5. क्या आज हमारे यहां लगभग 25 करोड़ परिवार नहीं हैं? क्या उनमें से लगभग 6 करोड़ पहले से ही लगभग नौ लाख की औसत आय उत्पन्न नहीं कर रहे हैं?
  6. क्या बाकी बचे हुये 19 करोड़ परिवार अतिरिक्त 93 लाख करोड़ की आय उत्पन्न नहीं कर सकते? जिससे हमारे औसत परिवार की कमाई  4 89 315 हो जाये? दूसरे शब्दों में, हर किसी की सालाना आय 98 हजार हो जाये।
  7. लेकिन क्या सिद्धांत रूप में भी इस प्रकार का समतावाद या यूटोपिया ढाई गुना प्रभाव उत्पन्न कर सकता है? क्या आपकी 5 साल की बेटी या अस्सी वर्ष की मेरी माँ;  ऐसी किसी गतिविधि में भाग ले सकती हैं?
  8. क्या इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो जाता कि हम इस स्तर पर सभी को अपना उत्पादन बढ़ाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते?
  9. अब क्या सवाल नहीं उठता है कि हम आज के माहौल में किस समूह से ऐसी महत्वाकांक्षाओं की आपूर्ति की उम्मीद कर सकते हैं?
  10. क्या  हमें इस चुनौती का हल करने के लिए अन्य विकल्पों का पता नहीं लगाना चाहिये?
  11. आइये कुछ विकल्पों पर विचार करें.
  12. विकल्प एक: क्या हम विचार नहीं कर सकते हैं, सिर्फ 1981 और 2001 के बीच पैदा हुए व्यक्तियों का; जो अपनी भरी जवानी में हैं जो नौ लाख रुपये के वर्तमान औसत से अधिक कमाने की महत्वाकांक्षा भी रखते हों?
  13. दूसरे विकल्प में क्या हम 1961 और 1981 के बीच पैदा हुए एैसे लोगों पर विचार नहीं कर सकते हैं जो वर्तमान में औसत से नीचे कमा रहे हों?
  14. तीसरा विकल्प क्या हम वरिष्ठ नागरिकों को जीवन के अपने अनुभवों का लाभ उठाने और वर्तमान औसत से अधिक "कमाई करने के लिए नहीं कह सकते है?
  15. विकल्प एक में हमारे पास लगभग 34,54,08,339 लोग हैं लेकिन उनमें से शायद  केवल 70% ही 9 लाख से अधिक कमाने की कोई महत्वाकांक्षा और क्षमता रखते हों; सो क्या हम इस खंड में केवल 24,17,85,837 पर विचार कर सकते हैं?
  16. परिदृश्य दो में हमारे पास लगभग 24, 40, 94,326 लोग हैं लेकिन उनमें से 30% शायद ही 9 लाख से अधिक कमाने की कोई महत्वाकांक्षा और क्षमता रखते हों; इसलिये क्या हम इस खंड में केवल 17, 08, 66,028 पर विचार कर सकते हैं?
  17. परिदृश्य तीन में हमारे पास लगभग 7, 81, 46,681  बुजुर्ग हैं, लेकिन उनमें से शायद ही 30% शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम हों अतएव  क्या हम इस खंड में केवल 5, 47, 02,677 पर विचार कर सकते हैं?
  18. क्या तीनों परिदृश्यों पर विचार करने पर हमारे पास 46, 73, 54,542 व्यक्तियों की एक विशाल संभावना नहीं है?
  19. लैकिन दिमागी कमतरता, सामाजिक हठधर्मिता, परिवारों की रूढ़िवादी प्रकृति, शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम होने की स्थिति, लिंग संबंधी पूर्वाग्रह, अनिश्चितताओं का डर और अतिसंवेदनशील मन में संदेह इत्यादि से ग्रस्तता के कारण; उनमें से 80% अभी जहां है वहीं बने रहना पसंद नहीं करते हैं क्या?  आज के करोना के दौर में किसी भी महत्वाकांक्षी भविष्य की आशा में विश्वास करना क्या उनके लिये सम्भव भी है?
  20. लेकिन फिर भी प्रसिद्ध 80 20 नियम के अनुसार शेष 20% को उनमें छिपे जोश, स्र्झान और संभावित योग्यता की पहचान करके क्या सशक्त व सक्षम नहीं बनाया जा सकता है?
  21. क्या हमारे पास 9 34 70 908 या तकरीबन ९ करोड़ संभावित लोग भी नहीं हैं? जो  साल में दस से पचास लाख कमाने की यात्रा शुरू करके (९ करोड़ लोग X रुपये 10 लाख = 90 ट्रिलियन या) 90 लाख करोड़ रुपये मौजूदा अर्थव्यवस्था में नहीं जोड़ सकते?
  22. क्या सिर्फ ९ करोड़ लोग; यदि प्रति वर्ष दस लाख रुपये कमाते हैं; अर्थव्यवस्था के टपकन सिद्धांत द्वारा हमें आसानी से $ 5 ट्रिलियन इकोनॉमी तक नहीं पहुँचा देंगे?
  23. क्या ठीक इसी जगह अपनी दिमागी कसरत मैं एक पेंच नज़र अन्दाज नहीं हो गया हमसे? जो क्या वैसा ही नहीं है जैसा पटवारी साहब सपरिवार नदी पार करते समय नदी की गहराई और अपने परिवार के सदस्यों की ऊंचाई का औसत निकालने में कर बैठे थे?
  24. यहां क्या हम भी बड़े खर्च करने वाले समूह की ताकत को ठीक उसी तरह औसत की आड़ मे छिपाकर नजर अन्दाज नहीं कर रहे थे?
  25. क्या यह 10 लाख से 50 लाख के बीच की कमाई करने वालों का वर्ग नहीं है? जो मात्र 56 लाख लोगों का ही है.
  26. जब इस वर्ग में 56 लाख लोग थे तब हमारी जीडीपी दो ट्रिलियन डॉलर थी; इसके सोलह गुना लोगों के, इस समूह में प्रवेश करने पर, हमारी जीडीपी सत्तावन (57) ट्रिलियन डॉलर पर पहुंचने से कौन रोक सकता है?
  27. दो साल पहले तक संपूर्ण विश्व की जीडीपी 87 ट्रिलियन डॉलर ही थी.
  28. पर 10 लाख से 50 लाख के बीच की कमाई करने वालों का वर्ग ही क्यों चुना गया है?

  29. क्या इससे कम आमदनी वाला वर्ग अपने यंहा पूर्णकालिक रसौईया, ड्राइवर, माली, आया या अन्य कर्मचारियों को रखकर एकाधिक सम्मानजनक रौज़गार उपलब्ध करा सकता है? और यदि यह नहीं हुआ तो फिर हम वह ढाई गुना प्रभाव कैसे उत्पन्न कर सकते हैं?
  30. क्या हम एक साधारण परिवार के सदस्यों (मां-बाप, दो-तीन बच्चे और दादा-दादी) की संख्या औसतन पांच मान सकते हैं?
  31. अब फिर से बोरिंग गणित पर आते हैं हमारे नवसमृद्धता की ओर बड़ने वाले व्यक्तियों के परिजनों को मिलाने पर 93470908 * 5 = क्या हम 467354540 की मानव संख्या पर नहीं पहुंच जाते?
  32. जो क्या हमारे देश की कुल 140 करोड़ आबादी का एक तिहायी नहीं है; या दूसरे शब्दों में देश के हर तीन परिवार में से एक परिवार?
  33. जो कि बचे हुए दो परिवारों में से कुछ को सीधा रौजगार (रसौईया, ड्राइवर आदि) तो कुछ को अन्य तरह से जैसे फल, सब्जी, किराना, जेवर, वाहन इत्यादि  खरीद कर; उनको पैदा करने, ढौने, बेचने, बनाने, संग्रह करने या मरम्मत करने के रौजगार नहीं उपलब्ध करा पायेंगे?
  34. और हमारी सिर्फ यह नवसमृद्ध आबादी (467354540) दुनिया के समृद्धतम एक या दो या तीन नहीं बल्कि उच्चतम आय वाले पूरे चौदह देशों की सम्मिलित आबादी* (436164599) से भी अधिक नहीं हो जायेगी क्या?
  35. * उच्चतम आय वाले समृद्धतम राष्ट्र
    # राष्ट्र आबादी
    1 लक्समबर्ग  625448
    2 नॉर्वे 5548387
    3 स्विट्जरलैंड 8570000
    4 आयरलैंड 4937786
    5 आइसलैंड  341243
    6 कतर 2902417
    7 संयुक्त राज्य अमेरिका 334044151
    8 डेनमार्क 5789471
    9 सिंगापुर 5849157
    10 ऑस्ट्रेलिया 25491691
    11 स्वीडन 10099265
    12 नीदरलैंड 17418465
    13 ऑस्ट्रिया 9006398
    14 फिनलैंड 5540720
    14 कुल 436164599
  36. क्या अब सवाल नहीं उठता है कि: क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
  37. क्या हमारे सामने एक और सवाल नहीं उठता है कि: हम जनसंख्या का इतना बड़ा हिस्सा कहां तैनात कर सकते हैं?
  38. पढ़ने के लिए यह बहुत बड़ा बनाने के डर से; यहां मैं अपने पहले से लिखे गए (लगभग चार साल पहले 2 जुलाई 2016 को 3:36 बजे) उत्तर की लिंक डाल रहा हूं जो आसानी से हमें अन्य व्यावहारिक चरणों के लिए मार्गदर्शन कर सकता है।
  39. अजय सक्सेना का जवाब है कि भारत को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में कितना समय लगेगा? और हम इसे जल्दी करने के लिए अभी क्या कर सकते हैं?
  40. यदि हममें से प्रत्येक इस दिशा में चिंतन करना शुरू कर दे और अन्य चार (जो कभी भी बदलाव के विचार को अपनाने वाले नहीं हैं) के विपरीत हर पाँच में से एक या हर दूसरे परिवार से एक; अपने"अस्सहाय्य-ग्रस्तता जनित हीन भावना" वाले छोटे आराम क्षेत्र के वैयक्तिक कोश को तोड़ डालें; क्या हम इस लक्ष्य को जल्द से जल्द प्राप्त नहीं कर सकते हैं?
  41. इस उद्दैश्य प्राप्ति की प्रक्रिया विकसित करने में क्या हमें देश के प्रत्येक कोने तक पहुंचने की व्यवस्था निर्माण नहीं करना चाहिये?
  42. क्या वहां पहुंच कर हर पाँच में से एक महात्वाकाँक्षी व्यक्ति ढूंढने हैतु हमे पूर्णतया स्थानीय और वह भी पूर्णकालिक व्यक्ति की आवश्यक्ता नहीं पड़ेगी? क्या हम उन्हें शिविर समन्वयक के रूप में नामित नहीं कर सकते? क्या आमजन के लिये वे इकोदूत की भूमिका नहीं निभायेंगे? क्या हम वसीयत में #25 पर उनकी स्थिती नहीं देख सकते?
  43. क्या इस लायक व्यक्तियों तक पहुंचने और उन तक यह सारा उनकी भाषा में समझाने के लिये हमें कुछ समझदार व वृहत सम्पर्क वृत्त वाले ऐसे महानुभावों जो कि अंशकालिक रूप से यह कर सकें; तक नहीं पहुंचना चाहिये? क्या हम उन्हें परामर्शक (पथ प्रदर्शक) के रूप में नामित नहीं कर सकते? क्या इकोदूतों के लिये वे इको-प्रसारक की भूमिका नहीं निभायेंगे? क्या हम उन्हें संक्षेप में प्यार से इकोरक नहीं पुकार सकते? क्या हम वसीयत में #24 पर उनकी स्थिती नहीं देख सकते?
  44. क्या हमें कुछ ऐसे सज्जनों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिनके पास भले ही ग्रामस्तरीय पर्याप्त संपर्क न भी हों, किंतु शहरी मित्रों, रिश्तेदारों, सहपाठीयों इत्यादि का व्यापक और सक्रिय नेटवर्क हो, जो आसानी से इस विचार को फैला सकें और भारत को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कुछ परामर्शकों (पथ प्रदर्शकों) का नामांकन कर सकें। क्या हम उन्हें टीम सलाहकार के रूप में नामित नहीं कर सकते? क्या इकोदूतों के लिये वे इको-प्रसारक की भूमिका नहीं निभायेंगे? क्या हम उन्हें संक्षेप में प्यार से इकोरक नहीं पुकार सकते? क्या हम वसीयत में #24 पर उनकी स्थिती नहीं देख सकते?
  45. पर क्या हम ऐसे समस्त लोगों की भाषा जानते हैं?
  46. तो इस हैतु अधिकांश राज्यों से कुछ ऐसे महनुभाव जो अपनी मातृभाषा के अलावा हिन्दी या अंग्रेजी भलीभांति जानते हों को नहीं ढूंढना चाहिये? क्या हम उन्हें राज्य सलाहकार के रूप में नामित नहीं कर सकते हैं? क्या इको-प्रसारकों के लिये वे इको-राज्य-प्रेक्षक की भूमिका नहीं निभायेंगे? क्या हम उन्हें संक्षेप में प्यार से इकोक्षक नहीं पुकार सकते? क्या हम वसीयत में #23 पर उनकी स्थिती नहीं देख सकते?
  47. क्या हम इन चारों तरह के एक भी व्यक्ति को नहीं जानते? या क्या हमारे विभिन्न सामाजिक समूहों मसलन वाटसेप ग्रुप में ऐसे किन्ही महानुभाव की उपलब्धता की थोड़ी भी सम्भावना नहीं है?
  48. क्या हम इस पूरे विचार द्वारा स्वयम या अपने परिवार के किसी एक सदस्य या फिर कम से कम एक अन्य परिवार से एक व्यक्ति को इस समूह में पहुंचने को प्रेरित नहीं कर सकते?
  49. यदि हम या वह व्यक्ति "वार्षिक 10 लाख से 50 लाख के बीच की कमाई" करने वालों के क्लब में शामिल होने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्रवाई आज शुरू करे तो राष्ट्र के प्रतिष्ठा पूर्ण लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता क्या?
  50. ईकोभारत समूह जिसमें आप, मैं और सभी सकारात्मक भारतीय लोग आते हैं को; क्या इस महायज्ञ का बीड़ा नहीं उठाना चाहिये?
  51. लेकिन क्या बिना कुछ संरचनात्मक व्यवस्था के यह समूह अकेला इसे लागू कर सकता है?
  52. क्या हमें किसी संस्था को यह जवाबदारी नहीं सौंपनी चाहिये?
  53. क्या हम इस सम्पूर्ण कार्यक्रम हैतु पारकेम्प भारत को इसके समन्वयन की जवाबदारी सौंप सकते है; जिसने इस तरह की प्रक्रियाओं को विकसित किया है?
  54. हमारी आहूति रूपी सक्रिय भागीदारी व प्रसाद के रूप में कुछ क्रीम के लिए उपलब्ध विकल्प इस प्रकार हैं:
  55. मैं भारत में दस से पचास लाखपति कैसै बन सकता हूं?
  56. लॉक डाउन में हम घर बैठे पैसा कैसे कमा सकते हैं?
  57. मैं कैसे इस लॉकडाउन से दस लाख या अधिक रुपये कमा सकता हूँ?
  58. मैं अपने गाँव देहात से 2020 में दस लाख या अधिक सालाना कैसे कमा सकता हूँ?
  59. कोरोनावायरस संकट के दौरान शुरू करने के लिए सबसे अच्छा व्यवसाय क्या है?
  60. गाँव और छोटे कस्बों से बड़े पैमाने पर कौन सा नया व्यवसाय किया जा सकता है?
  61. कौन सा इंटरनेट आधारित व्यवसाय छोटे कस्बों और गाँव में रह कर किया जा सकता है?
  62. में अगले 15 दिनों में ऐसा क्या कर सकता हूँ; कि मेरे देश की अर्थव्यवस्था दुनिया की सिरमौर अर्थव्यवस्था बन जाये?
  63.  इससे पहिले कि कहीं आपका पड़ौसी, कमाई का लायसेंस (शिविर समन्वयक बनने का) लॉक करदे और आप आज की सन्धि को नज़र अन्दाज करके; जिन्दगी भर हाथ मलते रह जायें, अपने गांव के लिये; अपनी, कमाई का लायसेंस आज अभी लॉक कीजिये

  64. कुछ अन्य रास्ते जिन पर चलकर हमारी क्षमतानुसार हम मंजिल तक पहुंच सकते हैं

  65. परामर्शक: यदि आप हमारे टीम सलाहकार  की मदद से इस साइट की सामग्री को संभावित शिविर समन्वयकों तक पहुंचा सकते हैं तब अभी इसे पढ़िये और आगे बड़ना शुरू कीजिये.

  66. टीम सलाहकार: यदि आप हमारे राज्य  सलाहकार की मदद से इस साइट की सामग्री को संभावित पथ प्रदर्शकों तक पहुंचा सकते हैं तब अभी इसे पढ़िये और आगे बड़ना शुरू कीजिये.

  67. राज्य सलाहकार: यदि आप अपने राज्य की भाषा में साइट की सामग्री का अनुवाद कर सकते हैं; और टीम सलाह कारों की मदद से संदेश पथ प्रदर्शकों तक पहुंचा सकते हैं तब अभी इसे पढ़िये और आगे बड़ना शुरू कीजिये.

  68. भारत में अमीर कैसे बना जा सकता है जानने के लिये इसे पढ़िये और अमीर बनने के रास्ते पर आगे बड़ना शुरू कीजिये आज से.