कौन सा इंटरनेट आधारित व्यवसाय छोटे कस्बों और गाँव में रह कर किया जा सकता है?

  1. इस सवाल के पहिले हिस्से "इंटरनेट आधारित" के बारे में सौचकर मुझे मेरी दुर्दशा पर रोना आ रहा है. जो शहर पूरे देश की न सिर्फ अर्थव्यवस्था में बल्कि कोरोना जैसी महामारी में भी अपनी 40% हिस्सेदारी रखने में नहीं चूकता; वहीं जब हमें अबाधित इंटरनेट; (गांठ के रुपये 50, 000 से अधिक वार्षिक देश के शीर्श इंटरनेट प्रदाताऔं को देने के बावजूद) न मिलता हो तो आपके सवाल के दूसरे हिस्से "व्यवसाय"जौ कि एक निहायत ही संजीदगी और पूरी गम्भीरता से लिया जाने वाला विषय है जहां हमे उसमें लिप्त अकेले व्यक्ति के बारे में न सोचकर बल्कि उस पर अवलम्बित परिवार, ग्राहक, उसके रसद प्रदाता, निवेशक, कर्मचारी और वित्तीय व्यवहार हैतु बैंकिंग अधोसंरचना का भी न सिर्फ अन्वेषण अपितु विश्लेशण भी करना होगा.
  2. किसी भी व्यवसाय में यदि निरंतरता और पूर्ण विश्वसनीयता का लेश मात्र भी अभाव रहता है तो उस व्यवसाय अवलम्बित समस्त समाज व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगते देर नहीं लगती. इसके अच्छे उदाहरणों में 2008 का अमरीकन सबप्राइम मोर्टगेज क्राइसिस या  जिनके चक्कर मे सदियों पुराने बैंकों से लेकर समप्रभुता सम्पन्न देशों की अर्थव्यवस्थायें धराशायी हों गयीं थीं. या अपने यहां के छोटे से अभी-अभी के .
  3. इस सन्दर्भ में मेरा अनुभव बताता है कि जब आरम्भ में बहुत थोड़े ग्राहक होते हैं और इंटरनेट प्रदाता के उपकरण नये नवेले होते हैं हमें बहुत ही शानदार कवरेज व स्पीड मिलती है. परन्तु जैसे ही एक तरफ तो हमारे देखा देखी हमारे पड़ौसी इत्यादि बड़ा तबका उसके उपयोग में पारंगत होता है और दूसरी तरफ एकुलती प्रदाता कम्पनी के बड़ते व्यवसाय को देखकर उसके ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने के चक्कर में नये प्रदातागण दर कम करने की गलाकाट स्पर्धा आरम्भ करते हैं तो नये उपकरणो की लागत और उनकी साल सम्हाल में लगे व्यक्तियों के वेतनदि सुविधाओं की कमी होना शुरू हो जाती है; जिसका परिणाम हमारे इंटरनेट की न सिर्फ निरंतरता अपितु उसकी अबाधिदता पर भी पड़कर हमारी सारी कार्य योजना का या यों कहें कि हमारे सपनों की बारात बिना फेरे के असमय ही एक दुरास्वप्न में परिवर्तित होना प्रारम्भ हो जाती है. इंटरनेट की निरंतरता व उसकी अबाधिदता न सिर्फ इंटरनेट प्रदाता पर निर्भर करती है अपितु हमारे द्वारा उसके उपभोग हैतु आवश्यक अनवरत विद्युत वितरण पर भी; जो शायद ही हमारे सभी गांव-देहात या छोटे कस्बों मे चौबीसों घण्टे अनवरत रहता हो?
  4. तकरीबन हर नये व्यवसाय की भी एसी ही कहानी होने में देर नहीं लगती जब न तो उसे चलाना लाभप्रद बचता और न ही उसे आगे बड़ाना जैसे वोडाफोन, आइडिया, बीएसएनएल इत्यादि, इत्यादि.
  5. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य के मद्देनज़र आपके सवाल के तीसरे हिस्से "छोटे कस्बों और गाँव में रह कर किये जा सकने" वाले व्यवसाय पर हम विचार करेंगे. यहां पर हम विदेशी कम्पनियों की आजन्म गुलामगिरी वाले कण्टेन्ट, वीडियो, लेख इत्यादि बनाने में अपना समय ज़ाया कर अपनी निरीहता पर खीजने की जगह; अपने उसी समय को अपने और अपने राष्ट्र की ताकत बनाने में प्रयुक्त करने और अपनी समृद्धि व समाज में अपनी सच्ची इज्जत बड़ाने वाले व्यवसाय में लगाने की गतिविधियों का हलका सा जायजा लेंगे.

  1. मेंरी जिन्दगी के प्रदीर्घ अनुभव से मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि प्रत्येक व्यक्ति दस हजार अन्य लोगों की तुलना में कम से कम एक काम बेहतर तरीके से कर सकता है। और आपको अचम्भित करने वाला तथ्य यह है कि उस व्यक्ति को उस काम करने में इतना मजा़ आता है कि उसे लगता ही नहीं कि वह काम कर रहा है.
  2. अब जरा कयास लगाइये कि यदि आपके हाथ मैं ऐसा दिया आ जाये जिससे आप भी अपने आसपास के हजारों लोगों के अन्दर छिपी प्रतिभा जान जायें और उन्हें ऐसी जगह काम पर लगवा दे जहां उनके हुनर की सर्वाधिक जरूरत भी हो और कीमत भी.
  3. जरा सोचें कि ऐसी परिस्थिती में जब वह व्यक्ति जो अभी अभी तक बैरोजगार ही था परन्तु आपके दीपक की एक चिनगारी की बदौलत लाखों रुपये कमाने लगे; उसके मां-बाप, भाई, बहन उसके रिश्तेदार और उसके मित्रों की नजर में आपके प्रति श्रद्धा कितनी बड़ जायगी?
  4. अब जरा विचार करें इस परिस्थिति मैं आपके चारों ओर के अन्य बैरोजगार या अल्पवैतनिक आपसे कैसे व्यवहार करेंगे, आपके समाज में, गांव देहात में, आपके कस्बे में आपको किन नजरों से देखा जायेगा? आपकी अमीरी का स्तर कहां पहुंच जायेगा?
  5. यदि यही दीपक आप अपने कालेज के ऐसे सहपाठियों, रिश्तेदारों और मित्रों से शेअर करें जो आपके गांव देहात या आपके कस्बे के बाहर रहते हों; तब आपका प्रभाव देश के किस-किस कोने तक नहीं पहुंच जायेगा?
  6. अब जरा इस फेण्टेसी में दीपक को निकाल कर उसकी जगह पारकेम्प® शिविर समन्वयक को रख लें तो आपकी यही फेण्टेसी जमीनी हकीकत में बदलते देर लगेगी क्या?
  7. यदि आप वास्तव में अपनी अमीरी के लिये वचनबद्ध होकर काम करने को इच्छुक हैं तब आपका यह कदम न सिर्फ आपको भारत में अमीर बनने में मदद करेगा बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था डॉलर 5 ट्रिलियन तक पहुंचाने में भी
  8. उपर्युक्त पेरग्राफ के बिन्दु 5 की गतिविधि हम कितने भी अनिश्चित इंटरनेट की मौजूदगी में अपने व्हटसेप ग्रुपों (समूहों) में शेयर करके अपने अनवरत चलने वाले व्यवसाय का शुभारम्भ वो भी बगैर कोई पूंजी लगाये आज ही से कर सकते हैं; यहां स्पर्श कर .